Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.98.28-29h: जो वीर योद्धा सेना के आगे खड़ा होकर अपने स्वामी के प्रति वीरता प्रदर्शित करता है तथा कभी भी भय से पीठ नहीं दिखाता, वह मेरे समान लोकों को प्राप्त करता है। 28 1/2 | mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भर्तुरर्थे च य: शूरो विक्रमेद् वाहिनीमुखे॥ २८॥
न भयाद् विनिवर्तेत तस्य लोका यथा मम।
अनुवाद
जो वीर योद्धा सेना के आगे खड़ा होकर अपने स्वामी के प्रति वीरता प्रदर्शित करता है तथा कभी भी भय से पीठ नहीं दिखाता, वह मेरे समान लोकों को प्राप्त करता है। 28 1/2
A valiant warrior who stands at the front of the army and displays his valour for his master and never turns his back in fear, attains worlds like mine. 28 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥