Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.98.26-27h: राजन! वाणी द्वारा ललकारे जाने पर और महावतों के काँटों से मारे जाने पर हाथियों के चिंघाड़ने का जो शब्द होता है, वह कोलाहल और गाड़ी की ध्वनि के साथ जो चिंघाड़ होता है, वही उस यज्ञ में वष्टकार है। नरेश्वर! युद्ध में 'दुन्दुभिकी' का जो गंभीर शब्द होता है, वह सामवेद के तीन मन्त्रों का उच्चारण करने वाले के द्वारा होता है। 26 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजन! वाणी द्वारा ललकारे जाने पर और महावतों के काँटों से मारे जाने पर हाथियों के चिंघाड़ने का जो शब्द होता है, वह कोलाहल और गाड़ी की ध्वनि के साथ जो चिंघाड़ होता है, वही उस यज्ञ में वष्टकार है। नरेश्वर! युद्ध में 'दुन्दुभिकी' का जो गंभीर शब्द होता है, वह सामवेद के तीन मन्त्रों का उच्चारण करने वाले के द्वारा होता है। 26 1/2॥
Rajan! The sound of elephants chirping when challenged by voice and being hit by the hooks of the mahouts, that chirping sound that is accompanied by noise and the sound of the cart, is the Vashtakaar in that Yagya. Nareshwar! The solemn sound of 'Dundubhiki' in battle is uttered by the one who recites the three mantras of Samveda. 26 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥