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mahabharat 12.98.24: हाथी, घोड़े और कवचधारी वीर पुरुषों के समूह श्येनचित् नामक उस युद्धयज्ञ की अग्नि हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.98.24 
कुञ्जराणां हयानां च वर्मिणां च समुच्चय:।
अग्नि: श्येनचितो नाम स च यज्ञे विधीयते॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हाथी, घोड़े और कवचधारी वीर पुरुषों के समूह श्येनचित् नामक उस युद्धयज्ञ की अग्नि हैं।
 
The elephants, horses and the groups of brave men in armour are the fire of that war sacrifice called Shyenachit. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)