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mahabharat 12.98.21-22h: रणभूमि में योद्धाओं के शरीर से जो रक्त की धारा बड़े वेग से बहती है, वह उस युद्धयज्ञ की अग्नि में समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली समृद्धि की पूर्णाहुति है ॥21 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  12.98.21-22h 
आवेगाद् यच्च रुधिरं संग्रामे स्रवते भुवि॥ २१॥
सास्य पूर्णाहुतिर्होमे समृद्धा सर्वकामधुक्।
 
 
अनुवाद
रणभूमि में योद्धाओं के शरीर से जो रक्त की धारा बड़े वेग से बहती है, वह उस युद्धयज्ञ की अग्नि में समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली समृद्धि की पूर्णाहुति है ॥21 1/2॥
 
The stream of blood that flows with great speed from the bodies of the warriors on the battlefield, is the full offering of prosperity that fulfills all the desires in the fire of that war sacrifice. 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)