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mahabharat 12.98.2: भीष्म बोले, "युधिष्ठिर! इस प्रसंग में अम्बरीष और इन्द्र के संवाद रूपी एक प्राचीन कथा का उदाहरण दिया जाता है॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.98.2 
भीष्म उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
अम्बरीषस्य संवादमिन्द्रस्य च युधिष्ठिर॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "युधिष्ठिर! इस प्रसंग में अम्बरीष और इन्द्र के संवाद रूपी एक प्राचीन कथा का उदाहरण दिया जाता है॥ 2॥
 
Bhishma said, "Yudhishthira! In this context, an example of an ancient story in the form of a dialogue between Ambrish and Indra is given.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)