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mahabharat 12.98.10: देवराज! यह सुदेव पहले मेरा सेनापति था। यह शान्त स्वभाव वाला सैनिक था; फिर यह मुझे कैसे लांघ रहा है?॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.98.10 
देवराज सुदेवोऽयं मम सेनापति: पुरा।
आसीद् योध: प्रशान्तात्मा सोऽयं कस्मादतीव माम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
देवराज! यह सुदेव पहले मेरा सेनापति था। यह शान्त स्वभाव वाला सैनिक था; फिर यह मुझे कैसे लांघ रहा है?॥10॥
 
Devraj! This Sudeva was my commander earlier. He was a soldier with a calm nature; then how is he crossing me?॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)