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mahabharat 12.98.1: युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! कृपया मुझे बताइए कि जो वीर योद्धा शत्रुओं के साथ वीरतापूर्वक युद्ध करते हैं और कभी पीठ नहीं दिखाते, वे युद्धभूमि में मारे जाने के बाद किन लोकों में जाते हैं?"   |   mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.98.1 
युधिष्ठिर उवाच
ये लोका युध्यमानानां शूराणामनिवर्तिनाम्।
भवन्ति निधनं प्राप्य तन्मे ब्रूूहि पितामह॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! कृपया मुझे बताइए कि जो वीर योद्धा शत्रुओं के साथ वीरतापूर्वक युद्ध करते हैं और कभी पीठ नहीं दिखाते, वे युद्धभूमि में मारे जाने के बाद किन लोकों में जाते हैं?"
 
Yudhishthira asked, "Grandfather! Please tell me, those brave warriors who fight bravely with the enemy and never turn their back, go to which worlds after dying in the battlefield?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)