Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.97.29: एक वीर क्षत्रिय, विजय की इच्छा और शत्रुओं के प्रति क्रोध से भरा हुआ, बड़े पराक्रम से युद्ध करता है। उसे इस बात का भी भान नहीं होता कि शत्रु उसके शरीर के अंगों को क्षत-विक्षत कर रहे हैं। | mahabharat अध्याय 12.97: शूरवीर क्षत्रियोंके कर्तव्यका तथा उनकी आत्मशुद्धि और सद्गतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शूरो हि काममन्युभ्यामाविष्टो युध्यते भृशम्।
हन्यमानानि गात्राणि परैर्नैवावबुध्यते॥ २९॥
अनुवाद
एक वीर क्षत्रिय, विजय की इच्छा और शत्रुओं के प्रति क्रोध से भरा हुआ, बड़े पराक्रम से युद्ध करता है। उसे इस बात का भी भान नहीं होता कि शत्रु उसके शरीर के अंगों को क्षत-विक्षत कर रहे हैं।
A valiant Kshatriya, filled with the desire for victory and anger against his enemies, fights with great vigour. He is not even aware of his body parts being mutilated by his enemies.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥