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mahabharat 12.97.20: हे प्रिये! ऐसे दुष्ट मनुष्यों को जन्म मत दो जो युद्धभूमि में अपने साथियों को छोड़कर सुरक्षित घर लौट आते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.97: शूरवीर क्षत्रियोंके कर्तव्यका तथा उनकी आत्मशुद्धि और सद्‍गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 97: शूरवीर क्षत्रियोंके कर्तव्यका तथा उनकी आत्मशुद्धि और सद्‍गतिका वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.97.20 
मा स्म तांस्तादृशांस्तात जनिष्ठा: पुरुषाधमान्।
ये सहायान् रणे हित्वा स्वस्तिमन्तो गृहान् ययु:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रिये! ऐसे दुष्ट मनुष्यों को जन्म मत दो जो युद्धभूमि में अपने साथियों को छोड़कर सुरक्षित घर लौट आते हैं।
 
O dear! Do not give birth to such wretched men who abandon their companions on the battlefield and return home safely.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)