श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 97: शूरवीर क्षत्रियोंके कर्तव्यका तथा उनकी आत्मशुद्धि और सद्‍गतिका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.97.15 
पृष्ठतो भीरव: संख्ये वर्तन्तेऽधर्मपूरुषा:।
शूराच्छरणमिच्छन्त: पर्जन्यादिव जीवनम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जैसे समस्त प्राणी बादलों के जीवनदायी जल की इच्छा रखते हैं, वैसे ही डरपोक और दीन लोग भी वीरों से रक्षा की इच्छा रखते हुए युद्ध में वीर योद्धाओं के पीछे खड़े रहते हैं॥15॥
 
Just as all living creatures desire the life-giving water of the clouds, similarly, the timid and lowly people, seeking protection from the brave, stand behind the valiant warriors in a war.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)