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mahabharat 12.97.13: युद्धभूमि में उसके शरीर से बहने वाले रक्त के साथ-साथ वह अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 12.97: शूरवीर क्षत्रियोंके कर्तव्यका तथा उनकी आत्मशुद्धि और सद्‍गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 97: शूरवीर क्षत्रियोंके कर्तव्यका तथा उनकी आत्मशुद्धि और सद्‍गतिका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.97.13 
यदस्य रुधिरं गात्रादाहवे सम्प्रवर्तते।
सह तेनैव रक्तेन सर्वपापै: प्रमुच्यते॥ १३॥
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में उसके शरीर से बहने वाले रक्त के साथ-साथ वह अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
 
On the battlefield, along with the blood that flows from his body, he becomes free from all his sins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)