Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.97.11: जो क्षत्रिय निर्भय होकर अपने शत्रुओं पर बाणों की वर्षा करता है और स्वयं बाणों की मार सहता है, उसके कार्य से बढ़कर देवता इस पृथ्वी पर कोई दूसरा शुभ कार्य नहीं देखते ॥11॥ | mahabharat अध्याय 12.97: शूरवीर क्षत्रियोंके कर्तव्यका तथा उनकी आत्मशुद्धि और सद्गतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो क्षत्रिय निर्भय होकर अपने शत्रुओं पर बाणों की वर्षा करता है और स्वयं बाणों की मार सहता है, उसके कार्य से बढ़कर देवता इस पृथ्वी पर कोई दूसरा शुभ कार्य नहीं देखते ॥11॥
The gods do not see any other auspicious act on this earth greater than the act of a Kshatriya who fearlessly showers arrows on his enemies and himself bears the blows of the arrows. ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥