Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.97.10: जब अवसर आता है, तब ब्राह्मण की रक्षा के लिए जो आगे बढ़कर शत्रु के विरुद्ध युद्ध करता है और अपने शरीर को यज्ञ की तरह होम कर देता है, उसका यज्ञ अनंत दक्षिणा युक्त यज्ञ के समान होता है ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.97: शूरवीर क्षत्रियोंके कर्तव्यका तथा उनकी आत्मशुद्धि और सद्‍गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 97: शूरवीर क्षत्रियोंके कर्तव्यका तथा उनकी आत्मशुद्धि और सद्‍गतिका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.97.10 
ब्राह्मणार्थे समुत्पन्ने योऽरिभि: सृत्य युध्यति।
आत्मानं यूपमुत्सृज्य स यज्ञोऽनन्तदक्षिण:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जब अवसर आता है, तब ब्राह्मण की रक्षा के लिए जो आगे बढ़कर शत्रु के विरुद्ध युद्ध करता है और अपने शरीर को यज्ञ की तरह होम कर देता है, उसका यज्ञ अनंत दक्षिणा युक्त यज्ञ के समान होता है ॥10॥
 
When the opportunity arises to protect a Brahmin, he who steps forward and wages war against the enemy and sacrifices his body like a sacrificial fire, his sacrifice is equivalent to a sacrifice containing infinite dakshina. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)