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mahabharat 12.96.4: राजा को बलपूर्वक पराजित व्यक्ति से कभी युद्ध नहीं करना चाहिए। उसे कैद करके एक वर्ष तक सद्भावनापूर्वक रहना सिखाना चाहिए; फिर उसका पुनर्जन्म होता है। वह विजयी राजा का पुत्र बन जाता है (अतः उसे एक वर्ष बाद रिहा कर देना चाहिए)।   |   mahabharat अध्याय 12.96: राजाके छलरहित धर्मयुक्त बर्तावकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 96: राजाके छलरहित धर्मयुक्त बर्तावकी प्रशंसा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.96.4 
बलेन विजितो यश्च न तं युध्येत भूमिप:।
संवत्सरं विप्रणयेत् तस्माज्जात: पुनर्भवेत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
राजा को बलपूर्वक पराजित व्यक्ति से कभी युद्ध नहीं करना चाहिए। उसे कैद करके एक वर्ष तक सद्भावनापूर्वक रहना सिखाना चाहिए; फिर उसका पुनर्जन्म होता है। वह विजयी राजा का पुत्र बन जाता है (अतः उसे एक वर्ष बाद रिहा कर देना चाहिए)।
 
The king should never fight a man who has been defeated by force. He should be imprisoned and taught to live in harmony for a year; then he is reborn. He becomes like a son to the victorious king (so he should be released after a year).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)