vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 96: राजाके छलरहित धर्मयुक्त बर्तावकी प्रशंसा
»
श्लोक 23
श्लोक
12.96.23
उच्चावचानि वित्तानि धर्मज्ञानां युधिष्ठिर।
आसन् राज्ञां पुराणानां सर्वं तन्मम रोचते॥ २३॥
अनुवाद
युधिष्ठिर! प्राचीन धर्मज्ञ राजाओं के पास जो नाना प्रकार की सम्पत्तियाँ थीं, वे भी मुझे प्रिय हैं॥ 23॥
Yudhishthira! I also like all the different kinds of wealth that the ancient Dharma-knowing kings had.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×