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mahabharat 12.96.22: हे भरतपुत्र! राजा नाभाग ने श्रोत्रिय और तपस्वियों का धन ब्राह्मणों को दक्षिणा में दे दिया।   |   mahabharat अध्याय 12.96: राजाके छलरहित धर्मयुक्त बर्तावकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 96: राजाके छलरहित धर्मयुक्त बर्तावकी प्रशंसा  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.96.22 
सराजकानि राष्ट्राणि नाभागो दक्षिणां ददौ।
अन्यत्र श्रोत्रियस्वाच्च तापसार्थाच्च भारत॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! राजा नाभाग ने श्रोत्रिय और तपस्वियों का धन ब्राह्मणों को दक्षिणा में दे दिया।
 
O son of Bharat! King Naabhaga gave away the wealth of the Shrotriys and ascetics to the Brahmins as Dakshina.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)