vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 96: राजाके छलरहित धर्मयुक्त बर्तावकी प्रशंसा
»
श्लोक 18
श्लोक
12.96.18
ऋत्विक् पुरोहिताचार्या ये चान्ये श्रुतसत्तमा:।
पूजार्हा: पूजिता यस्य स वै लोकविदुच्यते॥ १८॥
अनुवाद
जो राजा ऋत्विज, पुरोहित, आचार्य और अन्य पूजनीय विद्वानों का आदर करता है, वह प्रजा के कार्यों को जानने वाला कहा गया है ॥18॥
The king who honors Ritvija, priest, Acharya and other worshipable scholars is said to know the affairs of the people. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×