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mahabharat 12.96.14: हे राजन! जब विजयी राजा पर विपत्ति आती है, तब जो लोग राजा को कष्ट पहुँचाना चाहते हैं, वे विरोधियों द्वारा सब प्रकार से संतुष्ट होकर राजा के शत्रुओं का पक्ष लेते हैं॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.96: राजाके छलरहित धर्मयुक्त बर्तावकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 96: राजाके छलरहित धर्मयुक्त बर्तावकी प्रशंसा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.96.14 
अमित्रोपग्रहं चास्य ते कुर्यु: क्षिप्रमापदि।
संतुष्टा: सर्वतो राजन् राजव्यसनकाङ्क्षिण:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! जब विजयी राजा पर विपत्ति आती है, तब जो लोग राजा को कष्ट पहुँचाना चाहते हैं, वे विरोधियों द्वारा सब प्रकार से संतुष्ट होकर राजा के शत्रुओं का पक्ष लेते हैं॥14॥
 
O King! When a calamity befalls a victorious king, then those people who wish to cause trouble to the king, being satisfied in every way by the opponents, take the side of the king's enemies.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)