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mahabharat 12.95.9: यदि वह छल से युद्ध आरम्भ करे तो उसका सामना उसी प्रकार करना चाहिए और यदि वह धर्म से युद्ध आरम्भ करे तो उसका सामना धर्म से ही करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 12.95: विजयाभिलाषी राजाके धर्मानुकूल बर्ताव तथा युद्धनीतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 95: विजयाभिलाषी राजाके धर्मानुकूल बर्ताव तथा युद्धनीतिका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.95.9 
स चेन्निकृत्या युद्धॺेत निकृत्या प्रतियोधयेत्।
अथ चेद् धर्मतो युद्धॺेद् धर्मेणैव निवारयेत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
यदि वह छल से युद्ध आरम्भ करे तो उसका सामना उसी प्रकार करना चाहिए और यदि वह धर्म से युद्ध आरम्भ करे तो उसका सामना धर्म से ही करना चाहिए।
 
If he starts the war with deceit, one should face him in the same manner, and if he starts the war with Dharma, one should face him with Dharma only.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)