जैसे घड़ा पत्थर पर पटकने से टुकड़े-टुकड़े हो जाता है और सब लोग उसकी निन्दा करते हैं; इसलिए राजा को चाहिए कि वह धर्मपूर्वक धन और विजय की प्राप्ति की आकांक्षा करे ॥22॥
Like a pot banged on a stone, it breaks into pieces and everyone criticizes him; therefore, the king must aspire to acquire wealth and victory in a righteous manner. ॥22॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि विजिगीषमाणवृत्ते पञ्चनवतितमोऽध्याय:॥ ९५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें विजयाभिलाषी राजाका बर्तावविषयक पंचानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)