Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.95.2-3: भीष्म बोले, "हे राजन! पहले राजा को, सहायकों सहित या बिना सहायकों के, उस राज्य में जाना चाहिए जिसे वह जीतना चाहता है और वहाँ की प्रजा से कहना चाहिए कि मैं तुम्हारा राजा हूँ और सदैव तुम्हारी रक्षा करूँगा। या तो तुम धर्मानुसार कार्य करो या मुझसे युद्ध करो। यदि ऐसा कहकर वे उस राजा को अपना राजा स्वीकार कर लें, तो सबका कल्याण हो जाएगा।" 2-3   |   mahabharat अध्याय 12.95: विजयाभिलाषी राजाके धर्मानुकूल बर्ताव तथा युद्धनीतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 95: विजयाभिलाषी राजाके धर्मानुकूल बर्ताव तथा युद्धनीतिका वर्णन  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  12.95.2-3 
भीष्म उवाच
ससहायोऽसहायो वा राष्ट्रमागम्य भूमिप:।
ब्रूयादहं वो राजेति रक्षिष्यामि च व: सदा॥ २॥
मम धर्मबलिं दत्त किं वा मां प्रतिपत्स्यथ।
ते चेत् तमागतं तत्र वृणुयु: कुशलं भवेत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "हे राजन! पहले राजा को, सहायकों सहित या बिना सहायकों के, उस राज्य में जाना चाहिए जिसे वह जीतना चाहता है और वहाँ की प्रजा से कहना चाहिए कि मैं तुम्हारा राजा हूँ और सदैव तुम्हारी रक्षा करूँगा। या तो तुम धर्मानुसार कार्य करो या मुझसे युद्ध करो। यदि ऐसा कहकर वे उस राजा को अपना राजा स्वीकार कर लें, तो सबका कल्याण हो जाएगा।" 2-3
 
Bhishma said, "O King! First the king, with or without helpers, should go to the kingdom of the one he wants to conquer and tell the people there that I am your king and will always protect you, either do what is in accordance with Dharma or fight with me. If after saying this they accept the visiting king as their king, then everyone will be well." 2-3.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)