Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.95.11: युद्ध में विषैले और घातक बाणों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। ये दुष्टों के हथियार हैं। युद्ध उचित रीति से लड़ा जाना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति युद्ध में किसी को मारना चाहे, तो उस पर क्रोध नहीं करना चाहिए (बल्कि उसे उचित दण्ड देना चाहिए)। 11॥ | mahabharat अध्याय 12.95: विजयाभिलाषी राजाके धर्मानुकूल बर्ताव तथा युद्धनीतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इषुर्लिप्तो न कर्णी स्यादसतामेतदायुधम्।
यथार्थमेव योद्धव्यं न क्रुद्धॺेत जिघांसत:॥ ११॥
अनुवाद
युद्ध में विषैले और घातक बाणों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। ये दुष्टों के हथियार हैं। युद्ध उचित रीति से लड़ा जाना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति युद्ध में किसी को मारना चाहे, तो उस पर क्रोध नहीं करना चाहिए (बल्कि उसे उचित दण्ड देना चाहिए)। 11॥
Poisoned and lethal arrows should not be used in war. These are the weapons of the wicked. War should be fought in the right manner. If a person wants to kill someone in a war, one should not be angry at him (but should be punished as appropriate). 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥