Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.95.10: अपने घोड़े से सारथी पर आक्रमण मत करो। सारथी को केवल सारथी का ही सामना करना चाहिए। यदि शत्रु संकट में हो, तो उस पर आक्रमण मत करो। भयभीत और पराजित शत्रु पर कभी आक्रमण मत करो।॥10॥ | mahabharat अध्याय 12.95: विजयाभिलाषी राजाके धर्मानुकूल बर्ताव तथा युद्धनीतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नाश्वेन रथिनं यायादुदियाद् रथिनं रथी।
व्यसने न प्रहर्तव्यं न भीताय जिताय च॥ १०॥
अनुवाद
अपने घोड़े से सारथी पर आक्रमण मत करो। सारथी को केवल सारथी का ही सामना करना चाहिए। यदि शत्रु संकट में हो, तो उस पर आक्रमण मत करो। भयभीत और पराजित शत्रु पर कभी आक्रमण मत करो।॥10॥
Do not attack a charioteer with your horse. A charioteer should only face a charioteer. If the enemy is in trouble, do not attack him. Never attack an enemy who is scared and defeated.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥