Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.94.d2: जब राजा को यह पता चले कि साम, दान और भेद तीनों उपाय विफल हो गए हैं, तब शत्रु की दुर्बलता ज्ञात करके, अन्य किसी बात का विचार न करते हुए, दण्ड की नीति का प्रयोग करना चाहिए - शत्रु के विरुद्ध युद्ध छेड़ देना चाहिए। | mahabharat अध्याय 12.94: वामदेवके उपदेशमें राजा और राज्यके लिये हितकर बर्ताव । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब राजा को यह पता चले कि साम, दान और भेद तीनों उपाय विफल हो गए हैं, तब शत्रु की दुर्बलता ज्ञात करके, अन्य किसी बात का विचार न करते हुए, दण्ड की नीति का प्रयोग करना चाहिए - शत्रु के विरुद्ध युद्ध छेड़ देना चाहिए।
When the King finds that all the three methods of Sama (peace), Dana (donation) and Bhed (dishonesty) have failed, then after finding out the weakness of the enemy, without thinking of anything else, he should use the policy of punishment - he should wage war against the enemy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥