श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 94: वामदेवके उपदेशमें राजा और राज्यके लिये हितकर बर्ताव  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.94.9 
नैव द्विषन्तो हीयन्ते राज्ञो नित्यमनिघ्नत:।
क्रोधं निहन्तुं यो वेद तस्य द्वेष्टा न विद्यते॥ ९॥
 
 
अनुवाद
यदि राजा द्वेषी को कभी दण्ड न दे, तो उसके द्वेषियों की संख्या में कोई कमी नहीं होती; किन्तु जो क्रोध को मारने की कला जानता है, उसके द्वेषी नहीं रहते ॥9॥
 
If a king never punishes a hater, there is no reduction in the number of his haters; however, one who knows the art of killing anger has no haters. ॥9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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