नैव द्विषन्तो हीयन्ते राज्ञो नित्यमनिघ्नत:।
क्रोधं निहन्तुं यो वेद तस्य द्वेष्टा न विद्यते॥ ९॥
अनुवाद
यदि राजा द्वेषी को कभी दण्ड न दे, तो उसके द्वेषियों की संख्या में कोई कमी नहीं होती; किन्तु जो क्रोध को मारने की कला जानता है, उसके द्वेषी नहीं रहते ॥9॥
If a king never punishes a hater, there is no reduction in the number of his haters; however, one who knows the art of killing anger has no haters. ॥9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)