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mahabharat 12.94.7: जिसका सुख-सुविधाएँ दिन-प्रतिदिन बढ़ती रहती हैं, जो सब प्राणियों पर दया करता है, जो अपने काम में तत्पर रहता है और जो अपने शरीर की रक्षा का ध्यान रखता है, वह राजा क्रमशः उन्नति करता है ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.94: वामदेवके उपदेशमें राजा और राज्यके लिये हितकर बर्ताव   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 94: वामदेवके उपदेशमें राजा और राज्यके लिये हितकर बर्ताव  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.94.7 
भोगेषूदयमानस्य भूतेषु च दयावत:।
वर्धते त्वरमाणस्य विषयो रक्षितात्मन:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जिसका सुख-सुविधाएँ दिन-प्रतिदिन बढ़ती रहती हैं, जो सब प्राणियों पर दया करता है, जो अपने काम में तत्पर रहता है और जो अपने शरीर की रक्षा का ध्यान रखता है, वह राजा क्रमशः उन्नति करता है ॥7॥
 
A king whose luxuries and pleasures increase day by day, who is kind to all creatures, who is swift in his work and who takes care to protect his body, prospers gradually. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)