Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.94.13: भीष्म कहते हैं - हे राजन! वामदेव के उपदेश से राजा वसुमान उसी प्रकार अपने समस्त कर्तव्यों का पालन करने लगे। यदि तुम भी उन्हीं कर्मों का पालन करोगे, तो निःसंदेह तुम्हारा इस लोक में तथा परलोक में भी जीवन सुधर जाएगा।॥13॥ | mahabharat अध्याय 12.94: वामदेवके उपदेशमें राजा और राज्यके लिये हितकर बर्ताव । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म उवाच
इत्युक्तो वामदेवेन सर्वं तत् कृतवान् नृप:।
तथा कुर्वंस्त्वमप्येतौ लोकौ जेता न संशय:॥ १३॥
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - हे राजन! वामदेव के उपदेश से राजा वसुमान उसी प्रकार अपने समस्त कर्तव्यों का पालन करने लगे। यदि तुम भी उन्हीं कर्मों का पालन करोगे, तो निःसंदेह तुम्हारा इस लोक में तथा परलोक में भी जीवन सुधर जाएगा।॥13॥
Bhishma says - O King! After Vaamdev's advice, King Vasumana started performing all his duties in the same manner. If you also perform the same actions, then you will undoubtedly improve your life in this world as well as in the next. ॥13॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि वामदेवगीतासु चतुर्नवतितमोऽध्याय:॥ ९४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें वामदेवगीताविषयक चौरानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९४॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ५ श्लोक मिलाकर कुल १८ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥