श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 94: वामदेवके उपदेशमें राजा और राज्यके लिये हितकर बर्ताव  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.94.11 
नैनमन्येऽवजानन्ति नात्मना परितप्यते।
कृत्यशेषेण यो राजा सुखान्यनुबुभूषति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जो राजा अपने कर्तव्य पूरे करके ही सुख भोगना चाहता है, उसका न तो दूसरों द्वारा अनादर होता है और न वह स्वयं दुखी होता है ॥11॥
 
The king who wants to experience happiness only after completing his duties, is neither disrespected by others nor does he himself become unhappy. ॥11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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