Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.93.7: यदि राजा समर्थ हो तो उसे उत्तम सुख का अनुभव करना चाहिए और दूसरों को भी कराना चाहिए तथा यदि वह किसी संकट में पड़ जाए तो उसका निवारण करने का प्रयत्न करना चाहिए। ऐसा करने से वह समस्त प्राणियों का प्रिय बन जाता है और राजदेवी लक्ष्मी उसे कभी भ्रष्ट नहीं करतीं। | mahabharat अध्याय 12.93: वामदेवजीके द्वारा राजोचित बर्तावका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शक्त: स्यात् सुसुखो राजा कुर्यात् करणमापदि।
प्रियो भवति भूतानां न च विभ्रश्यते श्रिय:॥ ७॥
अनुवाद
यदि राजा समर्थ हो तो उसे उत्तम सुख का अनुभव करना चाहिए और दूसरों को भी कराना चाहिए तथा यदि वह किसी संकट में पड़ जाए तो उसका निवारण करने का प्रयत्न करना चाहिए। ऐसा करने से वह समस्त प्राणियों का प्रिय बन जाता है और राजदेवी लक्ष्मी उसे कभी भ्रष्ट नहीं करतीं।
If the king is capable, he should experience and make others experience the best of happiness and if he gets into trouble, he should try to solve it. By doing so, he becomes dear to all beings and is never corrupted by the royal goddess Lakshmi.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥