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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 93: वामदेवजीके द्वारा राजोचित बर्तावका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.93.4 
साहसप्रकृतिर्यत्र किंचिदुल्बणमाचरेत्।
अशास्त्रलक्षणो राजा क्षिप्रमेव विनश्यति॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जहाँ भी कोई साहसी स्वभाव वाला राजा अहंकारपूर्ण आचरण करता है और निर्धारित मर्यादाओं का उल्लंघन करता है, वह राजा शीघ्र ही नष्ट हो जाता है।
 
Wherever a king with a daring nature behaves in an arrogant manner, and violates the prescribed limits, that king is soon destroyed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)