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mahabharat 12.93.34: जो राजा मन को प्रिय न होते हुए भी मधुर व्यवहार से गुणवान पुरुषों को अपने वश में कर लेता है, वह दीर्घकाल तक प्रसिद्ध रहता है।   |   mahabharat अध्याय 12.93: वामदेवजीके द्वारा राजोचित बर्तावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 93: वामदेवजीके द्वारा राजोचित बर्तावका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.93.34 
अथ यो गुणसम्पन्नान् हृदयस्याप्रियानपि।
प्रियेण कुरुते वश्यांश्चिरं यशसि तिष्ठति॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
जो राजा मन को प्रिय न होते हुए भी मधुर व्यवहार से गुणवान पुरुषों को अपने वश में कर लेता है, वह दीर्घकाल तक प्रसिद्ध रहता है।
 
A king who, despite not being dear to the heart, brings virtuous men under his control by pleasant behaviour, remains famous for a long time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)