Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.93.33: जो द्वेषवश अपने हितैषी मित्रों और सगे-संबंधियों का आदर नहीं करता, जिसका मन चंचल है और जो क्रोध को दृढ़ता से पकड़े रहता है, वह सदा मृत्यु के निकट रहता है ॥ 33॥ | mahabharat अध्याय 12.93: वामदेवजीके द्वारा राजोचित बर्तावका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
य: कल्याणगुणान् ज्ञातीन् प्रद्वेषान्नो बुभूषति।
अदृढात्मा दृढक्रोध: स मृत्योर्वसतेऽन्तिके॥ ३३॥
अनुवाद
जो द्वेषवश अपने हितैषी मित्रों और सगे-संबंधियों का आदर नहीं करता, जिसका मन चंचल है और जो क्रोध को दृढ़ता से पकड़े रहता है, वह सदा मृत्यु के निकट रहता है ॥ 33॥
He who, out of malice, does not respect his own friends and relatives who have benevolent qualities, whose mind is fickle and who holds on to anger firmly, always lives near death. ॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥