Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.93.3: जब मनुष्य अच्छी स्थिति में होता है, तो अन्य लोग भी उसके आचरण का अनुसरण करते हैं, किन्तु जब वह संकट में होता है, तो उसके अपने सगे-संबंधी भी उस आचरण को सहन नहीं करते ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.93: वामदेवजीके द्वारा राजोचित बर्तावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 93: वामदेवजीके द्वारा राजोचित बर्तावका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.93.3 
यद् वृत्तमुपजीवन्ति प्रकृतिस्थस्य मानवा:।
तदेव विषमस्थस्य स्वजनोऽपि न मृष्यते॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जब मनुष्य अच्छी स्थिति में होता है, तो अन्य लोग भी उसके आचरण का अनुसरण करते हैं, किन्तु जब वह संकट में होता है, तो उसके अपने सगे-संबंधी भी उस आचरण को सहन नहीं करते ॥3॥
 
When a person is in a good state, other people also follow his behaviour but when he is in trouble, even his own relatives do not tolerate that behaviour. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)