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mahabharat 12.93.22: अपने पराक्रम से इस पृथ्वी को प्राप्त करके धर्मात्मा राजा को चाहिए कि वह धर्मपूर्वक अपनी प्रजा का पालन करे और युद्ध में अपने शत्रुओं का नाश करे ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 12.93: वामदेवजीके द्वारा राजोचित बर्तावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 93: वामदेवजीके द्वारा राजोचित बर्तावका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.93.22 
विक्रमेण महीं लब्ध्वा प्रजा धर्मेण पालयेत्।
आहवे निधनं कुर्याद् राजा धर्मपरायण:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
अपने पराक्रम से इस पृथ्वी को प्राप्त करके धर्मात्मा राजा को चाहिए कि वह धर्मपूर्वक अपनी प्रजा का पालन करे और युद्ध में अपने शत्रुओं का नाश करे ॥22॥
 
Having acquired this earth by his valour, a pious king should look after his subjects in a righteous manner and destroy his enemies in battle. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)