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mahabharat 12.93.2: वे उसी राजा का अनुसरण करते हैं जो पाप में लिप्त रहता है; इसलिए उपद्रवी लोगों से भरा हुआ राष्ट्र शीघ्र ही नष्ट हो जाता है ॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.93: वामदेवजीके द्वारा राजोचित बर्तावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 93: वामदेवजीके द्वारा राजोचित बर्तावका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.93.2 
राजानमनुवर्तन्ते तं पापाभिप्रवर्तकम्।
अविनीतमनुष्यं तत् क्षिप्रं राष्ट्रं विनश्यति॥ २॥
 
 
अनुवाद
वे उसी राजा का अनुसरण करते हैं जो पाप में लिप्त रहता है; इसलिए उपद्रवी लोगों से भरा हुआ राष्ट्र शीघ्र ही नष्ट हो जाता है ॥2॥
 
They follow the same king who is indulging in sin; hence a nation filled with unruly people soon gets destroyed. ॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)