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mahabharat 12.93.19: जो राजा अपने अप्रिय मित्रों के द्वारा गुप्त रूप से समस्त भूस्वामियों की स्थिति का निरीक्षण करता है, वह इस आचरण से श्रेष्ठ हो जाता है ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.93: वामदेवजीके द्वारा राजोचित बर्तावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 93: वामदेवजीके द्वारा राजोचित बर्तावका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.93.19 
ये केचित् भूमिपतय: सर्वांस्तानन्ववेक्षयेत्।
सुहृद्भिरनभिख्यातैस्तेन राजातिरिच्यते॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जो राजा अपने अप्रिय मित्रों के द्वारा गुप्त रूप से समस्त भूस्वामियों की स्थिति का निरीक्षण करता है, वह इस आचरण से श्रेष्ठ हो जाता है ॥19॥
 
The king who secretly inspects the condition of all the landowners through his unpopular friends, becomes the best by this behavior. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)