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mahabharat 12.93.11: यदि कोई तुम्हारा प्रिय तुम्हारा प्रिय बन जाए, तो अधिक प्रसन्न मत हो और यदि कोई तुम्हें अप्रिय लगे, तो भी अधिक चिन्ता मत करो। यदि तुम्हें आर्थिक संकट आ जाए, तो भी अपनी प्रजा के हित का चिन्तन करते हुए तनिक भी व्याकुल मत होओ। ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.93: वामदेवजीके द्वारा राजोचित बर्तावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 93: वामदेवजीके द्वारा राजोचित बर्तावका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.93.11 
प्रिये नातिभृशं हृष्येदप्रिये न च संज्वरेत्।
न तप्येदर्थकृच्छ्रेषु प्रजाहितमनुस्मरन्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई तुम्हारा प्रिय तुम्हारा प्रिय बन जाए, तो अधिक प्रसन्न मत हो और यदि कोई तुम्हें अप्रिय लगे, तो भी अधिक चिन्ता मत करो। यदि तुम्हें आर्थिक संकट आ जाए, तो भी अपनी प्रजा के हित का चिन्तन करते हुए तनिक भी व्याकुल मत होओ। ॥11॥
 
If someone dear to you becomes your favourite, do not be overjoyed and if someone dislikes you do not worry too much. If you face financial crisis, do not get upset at all while thinking about the welfare of your subjects. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)