श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 92: राजाके धर्मपूर्वक आचारके विषयमें वामदेवजीका वसुमनाको उपदेश  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.92.8 
अधर्मदर्शी यो राजा बलादेव प्रवर्तते।
क्षिप्रमेवापयातोऽस्मादुभौ प्रथममध्यमौ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
इसके विपरीत यदि राजा केवल बुराई पर ही ध्यान देता है और बलपूर्वक उसमें लिप्त हो जाता है, तो धर्म और अर्थ दोनों ही शीघ्र ही उसका साथ छोड़ देते हैं ॥8॥
 
On the contrary, if a king focuses only on evil and forcibly indulges in it, both the pursuits of Dharma and Artha soon abandon him. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)