श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 92: राजाके धर्मपूर्वक आचारके विषयमें वामदेवजीका वसुमनाको उपदेश  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.92.7 
अर्थसिद्धे: परं धर्मं मन्यते यो महीपति:।
वृद्धॺां च कुरुते बुद्धिं स धर्मेण विराजते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जो राजा धन प्राप्ति से भी अधिक धर्म को मानता है और उसकी वृद्धि के लिए मन और बुद्धि का प्रयोग करता है, वह धर्म के कारण महान यश प्राप्त करता है।
 
The king who considers Dharma to be greater than the attainment of wealth and uses his mind and intellect to promote it, attains great glory due to Dharma. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)