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mahabharat 12.92.6: वामदेवजी बोले - हे राजन! आपको धर्म का ही पालन करना चाहिए। धर्म से बढ़कर कुछ भी श्रेष्ठ नहीं है; क्योंकि धर्म में दृढ़ रहने वाले राजा सम्पूर्ण जगत को जीत लेते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.92: राजाके धर्मपूर्वक आचारके विषयमें वामदेवजीका वसुमनाको उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 92: राजाके धर्मपूर्वक आचारके विषयमें वामदेवजीका वसुमनाको उपदेश  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.92.6 
वामदेव उवाच
धर्ममेवानुवर्तस्व न धर्माद् विद्यते परम्।
धर्मे स्थिता हि राजानो जयन्ति पृथिवीमिमाम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वामदेवजी बोले - हे राजन! आपको धर्म का ही पालन करना चाहिए। धर्म से बढ़कर कुछ भी श्रेष्ठ नहीं है; क्योंकि धर्म में दृढ़ रहने वाले राजा सम्पूर्ण जगत को जीत लेते हैं।
 
Vaamdevji said-O King! You should follow Dharma only. There is nothing better than Dharma; because the kings who remain steadfast in Dharma conquer the whole world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)