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mahabharat 12.92.5: तब तपस्वियों में श्रेष्ठ और सुवर्ण के समान कान्ति वाले महामुनि वामदेव ने नहुषपुत्र ययाति के समान सुखपूर्वक बैठे हुए राजा वसुमान से कहा ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.92: राजाके धर्मपूर्वक आचारके विषयमें वामदेवजीका वसुमनाको उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 92: राजाके धर्मपूर्वक आचारके विषयमें वामदेवजीका वसुमनाको उपदेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.92.5 
तमब्रवीद् वामदेवस्तेजस्वी तपतां वर:।
हेमवर्णं सुखासीनं ययातिमिव नाहुषम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तब तपस्वियों में श्रेष्ठ और सुवर्ण के समान कान्ति वाले महामुनि वामदेव ने नहुषपुत्र ययाति के समान सुखपूर्वक बैठे हुए राजा वसुमान से कहा ॥5॥
 
Then the great sage Vaamadev, the best among ascetics and having the brilliance of gold, spoke to King Vasumana, who was sitting comfortably like Yayati, the son of Nahusha. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)