श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 92: राजाके धर्मपूर्वक आचारके विषयमें वामदेवजीका वसुमनाको उपदेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.92.2 
भीष्म उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
गीतं दृष्टार्थतत्त्वेन वामदेवेन धीमता॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - राजन् ! इस विषय में लोग तत्वदर्शी महात्मा वामदेवजी द्वारा दिये गये उपदेश रूपी प्राचीन इतिहास का उदाहरण देते हैं ॥2॥
 
Bhishmaji said – King! In this regard, people give the example of an ancient history in the form of a sermon given by the philosopher Mahatma Vamdevji. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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