श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 92: राजाके धर्मपूर्वक आचारके विषयमें वामदेवजीका वसुमनाको उपदेश  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.92.19 
गुरुप्रधानो धर्मेषु स्वयमर्थानवेक्षिता।
धर्मप्रधानो लाभेषु स चिरं सुखमश्नुते॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य धर्म के विषय में अपने गुरु को सर्वोच्च मानता है और उनकी शिक्षाओं का पालन करता है, जो स्वयं समस्त भौतिक वस्तुओं का ध्यान रखता है, तथा जो सभी लाभों में धर्म को ही सर्वोच्च लाभ मानता है, वह दीर्घकाल तक सुख भोगता है॥19॥
 
He who regards his Guru as the supreme authority in matters of Dharma and follows his teachings, who himself looks after all the material things, and who considers Dharma as the supreme benefit among all kinds of gains, enjoys happiness for a long time.॥ 19॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि वामदेवगीतासु द्विनवतितमोऽध्याय:॥ ९२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारतशान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें वामदेवजीकी गीताविषयक बानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)