श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 92: राजाके धर्मपूर्वक आचारके विषयमें वामदेवजीका वसुमनाको उपदेश  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.92.13 
एतेष्वेव हि सर्वेषु लोकयात्रा प्रतिष्ठिता।
एतानि शृण्वँल्लभते यश: कीर्तिं श्रियं प्रजा:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
राजा के जीवन की यात्रा इन सब पर निर्भर है। इन सब को सुनने और मानने से राजा को यश, वैभव, धन और प्रजा की प्राप्ति होती है॥13॥
 
The journey of the king's life depends on all these. By listening and accepting all these, the king gets fame, glory, wealth and subjects.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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