श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 92: राजाके धर्मपूर्वक आचारके विषयमें वामदेवजीका वसुमनाको उपदेश  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.92.10 
अर्थानामननुष्ठाता कामचारी विकत्थन:।
अपि सर्वां महीं लब्ध्वा क्षिप्रमेव विनश्यति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जो राजा सम्पूर्ण लोकों का राज्य पाकर भी अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए कोई प्रयत्न नहीं करता तथा स्वेच्छाचारी एवं घमंडी रहता है, वह शीघ्र ही नष्ट हो जाता है ॥10॥
 
A king who does not make any attempt to achieve his ends meet and is willful and boastful, even after acquiring the kingdom of the entire world, is soon destroyed. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)