पृथ्वीनाथ! मान्धाता की भाँति तुम भी धर्म का पालन करते हुए इस पृथ्वी की रक्षा करो; तब तुम्हें भी स्वर्ग में स्थान प्राप्त होगा॥60॥
Prithvinath! Just like Mandhata, you too should protect this earth by following the Dharma properly; then you too will attain a place in heaven. ॥ 60॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि उतथ्यगीतासु एकनवतितमोऽध्याय:॥ ९१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें उतथ्यगीताविषयक इक्यानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)