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mahabharat 12.91.60: पृथ्वीनाथ! मान्धाता की भाँति तुम भी धर्म का पालन करते हुए इस पृथ्वी की रक्षा करो; तब तुम्हें भी स्वर्ग में स्थान प्राप्त होगा॥60॥   |   mahabharat अध्याय 12.91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  12.91.60 
भवानपि तथा सम्यङ्मान्धातेव महीपते।
धर्मं कृत्वा महीं रक्ष स्वर्गे स्थानमवाप्स्यसि॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! मान्धाता की भाँति तुम भी धर्म का पालन करते हुए इस पृथ्वी की रक्षा करो; तब तुम्हें भी स्वर्ग में स्थान प्राप्त होगा॥60॥
 
Prithvinath! Just like Mandhata, you too should protect this earth by following the Dharma properly; then you too will attain a place in heaven. ॥ 60॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि उतथ्यगीतासु एकनवतितमोऽध्याय:॥ ९१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें उतथ्यगीताविषयक इक्यानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९१॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)