भीष्म उवाच
स एवमुक्तो मान्धाता तेनोतथ्येन भारत।
कृतवानविशङ्कश्च एक: प्राप च मेदिनीम्॥ ५९॥
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - भरतपुत्र! उथथय के ऐसा उपदेश देने पर मान्धाता ने निःसंकोच होकर उनकी आज्ञा का पालन किया और सम्पूर्ण पृथ्वी पर एकछत्र राज्य प्राप्त किया।
Bhishma says - Son of Bharat! After Utthaya gave such advice, Mandhata obeyed his orders without any doubt and attained sole rule over the entire earth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)