श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  12.91.58 
धर्मवृत्तं हि राजानं प्रेत्य चेह च भारत।
देवर्षिपितृगन्धर्वा: कीर्तयन्ति महौजस:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! महाबली देवता, ऋषि, पितरों और गन्धर्वों ने इस लोक में तथा परलोक में भी उस धर्मात्मा राजा का गुणगान किया है॥58॥
 
Bharat! The mighty gods, sages, manes and Gandharvas keep singing the praises of the pious king in this world as well as the next. ॥ 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)