श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  12.91.56 
एतद् वृत्तं वासवस्य यमस्य वरुणस्य च।
राजर्षीणां च सर्वेषां तत् त्वमप्यनुपालय॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र, यम, वरुण और समस्त राजाओं का यही आचरण है। तुम भी इसका नियमित पालन करो ॥ 56॥
 
This is the behavior of Indra, Yama, Varuna and all the kings. You too should follow it regularly. ॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)