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mahabharat 12.91.51: ऐसा करने से तुम्हें समस्त प्राणियों के परम धर्म का ज्ञान प्राप्त हो जाएगा; फिर चाहे तुम अपने देश में रहो या विदेश में, तुम्हारा धर्म कहीं भी नष्ट नहीं होगा ॥ 51॥   |   mahabharat अध्याय 12.91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  12.91.51 
अतस्त्वं सर्वभूतानां धर्मं वेत्स्यसि वै परम्।
स्वदेशे परदेशे वा न ते धर्मो विनङ्क्ष्यति॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
ऐसा करने से तुम्हें समस्त प्राणियों के परम धर्म का ज्ञान प्राप्त हो जाएगा; फिर चाहे तुम अपने देश में रहो या विदेश में, तुम्हारा धर्म कहीं भी नष्ट नहीं होगा ॥ 51॥
 
By doing this you will attain the knowledge of the ultimate Dharma of all beings; then whether you live in your own country or abroad, your Dharma will not be destroyed anywhere. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)